"काम हर कोई करता है, लेकिन कुछ लोग इसे निष्ठा, विश्वास
और श्रद्धा के साथ करते हैं, जबकि कुछ इसे केवल अपनी ड्यूटी समझकर,
पैसे के लिए करते हैं। मैं आज यह लिखने के लिए मजबूर हूं कि
काम जब कोई करता है, तो वह अपने प्रयासों से दूसरों को दिखता
है। इसे दिखाने की आवश्यकता नहीं होती। बार-बार यह कहना कि 'मैंने
इतना किया, ऐसा किया, सबसे
ज्यादा किया, उसने कुछ नहीं किया, बस घूमता है, फाकी मारता है, छुट्टी
में रहता है, मनमर्जी से ऑफिस आता है, बोस का चहेता है,' यह
सब कहना सही नहीं है।
यह भी सच है कि हम सभी अपने स्तर से
बेहतर देने की कोशिश करते हैं, लेकिन कभी-कभी दूसरे की लाइन को छोटा
करने और अपनी लाइन को बड़ा करने की होड़ में हम अपनी पहचान और काम को धूमिल कर
देते हैं। यह हमारे लिए चिंता का विषय होना चाहिए। कई बैठकों में या अनौपचारिक रूप
से, मैंने इस तरह की प्रवृत्तियों से बचने के
लिए कई बार कहा है, फिर भी हम दूसरों को ठेस पहुँचाते रहते
हैं।
आप सभी जानते हैं कि हमारे लिए हर किसी
के काम के गहरे मायने हैं। जिनके पास काम नहीं है, वे
प्रगति और पहचान के मामले में पीछे हैं। किनका काम ज्यादा है या कम है, इस पर विचार करना मेरा कार्य है, और
मैं इसे अच्छे से करता हूं। लेकिन अफसोस, आजकल
कुछ तथाकथित लोग यह काम करने लगे हैं, जो
मूल्यों और कर्तव्यों के खिलाफ हैं। आजकल, जिन
लोगों ने दूसरों को खींचने की बजाय हाथ से सहारा देने की आदत डाली है, उन्हें ज्यादा सराहा जाता है। जो ऐसा नहीं करते, वे अपनी पहचान खो रहे हैं। सम्मान न देने वाले अपना आत्मसम्मान
खो देते हैं।
बिना किसी वजह के बुराई करना, अपमानित करना, जलन और निंदा करना, सभी के सामने इमेज खराब करना, किसी
के कपड़े, सुंदरता या विचारों पर टिप्पणियां करना,
काम की तुलना करना, सही
राय न देना और प्रशंसा न करना आजकल कुछ साथियों का आदत बन गई है। ये जलने वाले लोग
आपके जैसा बनना तो चाहते हैं, परंतु उनकी जलन और इर्ष्या ने उन्हें
ऐसा बनने नहीं दिया। वे आपकी बराबरी करना चाहते हैं, लेकिन
कर नहीं पा रहे हैं। वे आपके जैसा जीवन जीना चाहते हैं, लेकिन
जी नहीं पा रहे हैं। आप लगातार तरक्की कर रहे हैं, आपकी
पर्सनालिटी दूसरों से बेहतर हो रही है, मान-सम्मान
बढ़ रहा है, तो उनका जलना स्वाभाविक है। हालांकि,
यह उनकी बेवकूफी है, लेकिन
अगर अक्ल आई तो जलना छोड़ देंगे।
आपका काम है आगे बढ़ते जाना। जलने वाले
जलते रहेंगे, और हम बढ़ते रहेंगे।"
Indramani Sahu
13.04.2022