मंगलवार, 21 दिसंबर 2021

किसी ओर से मुहब्बत करनी पड़ेगी....

"इंसान हॅू

इंसान ही रहने दो

मत बांधो मुझे धर्मा, संस्कारों की बेड़ियों में

परंपरा, संस्कृति, सिद्धांत, रीति-नीति

की वजह से ही

आज तक

यहीं अटका पड़ा हॅॅू

परंतु, अब नहीं,

मुझे अब किसी ओर से

मुहब्बत करनी पड़ेगी.

        -इन्द्रमणि साहू 

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