मंगलवार, 28 जुलाई 2020

दफ्न करते रहे सपनों को...


"छोटी-छोटी ख्वाहिशों को
आज तक समेट नहीं पाया
अपने जख्मों को
हरा नहीं कर पाया
और दफ्न करते रहे सपनों को
अपने ही घरों में  
और तुमने कह दिया
बड़ी आसानी से
कि दूसरे के जलते तवे पर
रोटी सेक ली आपने..."
-इन्द्रमणि साहू
27/07/2020

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