मंगलवार, 21 अप्रैल 2009

एक कविता तुम्हारे नाम

एकांत क्षणों में
लिख लेता हूँ
एक साथ कई कविताएँ
तुम्हारे नाम के
पर
तुम्हारी मौजूदगी में
जड्शुन्य हो जाता हूँ .

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