शुक्रवार, 3 मई 2024

कभी-कभी

 "कभी-कभी 

अपनी मुर्खता पर भी 

हंसी आती है..."

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"याद रखना

तुम्हें भी लिखूंगा

एक-एक शब्द 

तब, जब 

पूरी तरह समझ जायेंगे..."

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"किस्मत 

बदलती है 

बैठकर मात्र 

सोचने रहने से नहीं....."

-इन्द्रमणि साहू 


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