"कभी-कभी
अपनी मुर्खता पर भी
हंसी आती है..."
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"याद रखना
तुम्हें भी लिखूंगा
एक-एक शब्द
तब, जब
पूरी तरह समझ जायेंगे..."
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"किस्मत
बदलती है
बैठकर मात्र
सोचने रहने से नहीं....."
-इन्द्रमणि साहू
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