शनिवार, 7 सितंबर 2013

सुप्रीम कोर्ट ने गरीब बच्चों के लिए खोला निजी स्कूलों का दरवाजा


सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा अधिकार कानून 2009 को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया है- इससे देशभर गरीब लोगों के बीच खुशी की लहर है। कई वर्षो के लंबे संघषों के बाद शिक्षा को मौलिक अधिकार में शामिल किया गया है और अब इसे एक कानूनी स्वरूप दिया गया है। अब इस कानून के आने से बेशक गरीब समुदाय के लोगों को लाभ मिलेगा। क्या-ंक्या लाभ हासिल होगा वह एक नजर में कुछ इस प्रकार है-ं
Ø देश के हर 6 से 14 साल की उम्र के बच्चे को मुफ्त शिक्षा हासिल होगी यानी हर बच्चा पहली से आठवीं कक्षा तक मुफ्त और अनिवार्य रूप से पाय़ेगा।
 Øनिजी या सरकारी स्कूलों में नामांकन में टीसी व बर्थ सर्टिफिकेट की बाध्यता नहीं होगी।
Øसभी बच्चों को घर के आस-ंपास के स्कूलों में दाखिला हासिल करने का हक होगा।
Øकिसी भी स्कूल में दाखिले के लिए बच्चे या माता-ंपिता की परीक्षा नहीं ली जायेगी।
Øसभी तरह के स्कूल चाहे वे सरकारी हों, अर्द्धसरकारी हों, सरकारी सहायता प्राप्त हों, गैर सरकारी हों, केंद्रीय विधालय हों, नवोदय विधालय हों, सैनिक स्कूल हों, सभी इस कानून के दायरे में आ गया है।
Øगैर सरकारी स्कूलों को भी 25 फीसदी सीटें गरीब वर्ग के बच्चों को मुफ्त मुहैया करानी होगी। जो ऐसा नहीं करेंगे, उनकी मान्यता रद्द कर दी जायेगी.
Øसभी स्कूल शिक्षित-ंप्रशिक्षित अध्यापकों को ही भरती करेंगे और अध्यापक छात्र अनुपात 1ः30 रहेगा। सरकारी स्कूलों के अप्रशिक्षित शिक्षकों को सरकार तीन वर्ष के भीतर प्रशिक्षित करेगी।
Ø सभी स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं होनी अनिवार्य है। इसमें क्लास रूम, टाॅयलेट, खेल का मैदान, पीने का पानी, लंच, लाइब्रेरी आदि शामिल है।
Ø स्कूल न तो प्रवेश के लिए कैपिटेशन फीस ले सकते हैं और न ही किसी तरह का डोनेशन। अगर इस तरह का कोई मामला प्रकाश में आया, तो स्कूल पर 25000 से 50000 रू0 तक का जुर्माना वसूला जायेगा।
Øशिक्षकों के ट्यूशन पर प्रतिबंध होगा।
Ø किसी बच्चे को शारीरिक व मानसिक सजा या दंड़ नहीं दी जा सकेगी। इसका उल्लंघन करनेवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
Ø वर्ग आठ तक कोई बच्चा फेल नहीं होगा। सिर्फ उनका एसेसमेंट होगा।
-ंस्रुपीम कोर्ट के आदेश पर आधारित


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